मेरे लोग कुछ अपने लोग
कुछ दमदार लोग, कुछ वफ़ा दार लोग
कुछ दार्शनिक लोग , कुछ क्रांतकारी लोग
कुछ नरमपंथी लोग , कुछ चरमपंथी लोग
कुछ देश मै लुटते लोग , कुछ भूख से मरते लोग
कुछ गंदगी मै घुटते लोग , कुछ आपसमै लड़ते लोग
कुछ देश के नेता लोग , कुछ देश पर शहीद लोग
कुछ देश पर निशार लोग , कुछ देश के गद्दार लोग
कुछ इन्हे देखते लोग, कुछ इन्हे जानते लोग
कुछ इन्हे पूजते लोग , कुछ इन्हे मारते लोग
फ़िर भी हम सब अपने लोग
हम स्वंतंत्र भारत के लोग
Friday, August 8, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

1 comments:
good thought. Clear, concise and specific.
Good job Ambrish. Your poem embodies India.
Post a Comment