पेपर लीक: यह नई समस्या नहीं, बल्कि दशकों पुरानी व्यवस्था की बीमारी है
हर बार जब किसी बड़ी परीक्षा का पेपर लीक होता है, तो कुछ दिनों तक देशभर में आक्रोश दिखाई देता है। सरकारें बयान देती हैं, जांच एजेंसियां सक्रिय हो जाती हैं, कुछ गिरफ्तारियां होती हैं और फिर धीरे-धीरे मामला ठंडा पड़ जाता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल वही रहता है—क्या यह केवल किसी एक सरकार की विफलता है, या फिर पूरी परीक्षा व्यवस्था (System) की कमजोरी? सच्चाई यह है कि भारत में पेपर लीक कोई नई घटना नहीं है। पिछले तीन दशकों में केंद्र और लगभग हर बड़े राज्य में किसी न किसी महत्वपूर्ण भर्ती या प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक होने की खबर सामने आई है। रेलवे भर्ती, SSC, AIPMT, NEET, UGC-NET, CBSE, REET, UPTET, UP Police, Vyapam, TSPSC, UKSSSC जैसी अनेक परीक्षाएं इस समस्या से प्रभावित रही हैं। विभिन्न जांच रिपोर्टों के अनुसार 2002 से 2025 के बीच ही कम से कम 45 बड़े पेपर लीक के मामले सामने आए, जिनसे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ। ( The Indian Express ) सरकार बदलती रही, समस्या बनी रही यदि पेपर लीक केवल किसी एक राजनीतिक दल या सरकार की विफलता होती, तो सरकार बदलने के साथ यह समस्या समाप्त हो जानी चाहिए ...




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